बाबा अजीत सिंह जी और बाबा जुझार सिंह जी के शहीदी दिवस पर गुरुद्वारा दमदमा साहिब में धार्मिक दीवान सजाए गए

सर्वंसदानी साहिब-ए-कमाल श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब जी के बड़े साहिबज़ादे बाबा अजीत सिंह जी और बाबा जुझार सिंह जी के शहीदी दिवस के अवसर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से गुरुद्वारा दमदमा साहिब में धार्मिक दीवान सजाए गए।इस अवसर पर विभिन्न रागी सिंहों के जत्थों ने गुरु की दिव्य बाणी से संगत को निहाल किया।
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कमेटी के प्रधान सरदार हरमीत सिंह कालका और जनरल सेक्रेटरी सरदार जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह साहिब जी के चारों साहिबज़ादों की शहादत की गाथाएं नई पीढ़ी को सुनाने से सिख कौम और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि साहिबज़ादे हमारी नई पीढ़ी के लिए रोल मॉडल हैं।न्यूज़ीलैंड में नगर कीर्तन को रोकने की घटना का उल्लेख करते हुए सरदार कालका और सरदार काहलों ने कहा कि सिखी की धरती पंजाब में ईसाई धर्म के कुछ नेता बड़े स्तर पर लालच देकर गरीब सिखों का धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब गुरु की लाडली फौज, निहंग सिंहों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो उसके परिणामस्वरूप ही न्यूज़ीलैंड की घटना घटी। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए चिंता का विषय है कि सिखी की रक्षा की जिन पर मूल जिम्मेदारी है, वे पंजाब में अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे हैं, इसी कारण ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 550वें शहीदी दिवस की चर्चा करते हुए सरदार कालका और सरदार काहलों ने कहा कि लाल किले पर तीन दिन तक चले विशाल कार्यक्रमों में लाखों लोगों ने नतमस्तक होकर श्रद्धा प्रकट की, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि इस स्तर के आयोजनों से बच्चों को सिख धर्म को जानने और सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने बच्चों को सिख इतिहास से परिचित कराएं, तभी सिखी मजबूत होगी।इस अवसर पर उन्होंने संगत से अपील की कि शिक्षा के क्षेत्र के लिए दशवंध अवश्य निकालें। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने बच्चों को शिक्षित करने में सफल हो गए, तो हमारे सभी प्रयास सफल हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि कौम की पूंजी अनमोल है और यदि इसका सही उपयोग शिक्षा के लंगर के लिए किया जाए, तो इसके बहुत अच्छे और दीर्घकालिक परिणाम सामने आएंगे।इस मौके पर उन्होंने संगत से यह भी अपील की कि वे 25 दिसंबर को सजाए जाने वाले नगर कीर्तन, 26 दिसंबर को छोटे साहिबज़ादों और माता गुजरी जी के शहीदी दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों तथा 27 दिसंबर को साहिब-ए-कमाल श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब जी के प्रकाश पर्व के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में शामिल हों।

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