दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा आज गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में गुरमुखी लिपि के शोध केंद्र की नींव रखी गई। इस अवसर पर दिल्ली के कैबिनेट मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और जनरल सेक्रेटरी सरदार जगदीप सिंह काहलों विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। तीनों नेताओं ने संयुक्त रूप से इस केंद्र का शिलान्यास किया।
इस मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि गुरमुखी केवल एक लिपि नहीं है, बल्कि यह हमारी सोच, हमारी संस्कृति और हमारी पहचान है। उन्होंने कहा कि यह लिपि हमें गुरु साहिबान द्वारा प्रदान की गई है और यही हमारी मातृभाषा है। उन्होंने कहा कि आज पंजाबी लोग अपनी मातृभाषा के कारण ही देश-विदेश में नाम कमा रहे हैं। इस गुरमुखी लिपि ने हमें एक विशिष्ट पहचान दी है और आज पूरी दुनिया यह मानती है कि जब भी मानवता पर कोई संकट आता है, तो यह कौम सबसे पहले आगे बढ़कर मानव सेवा करती है। उन्होंने कहा कि जहां भारत में हमारी संख्या केवल 2 प्रतिशत है, वहीं विश्व स्तर पर भी हमारी संख्या कम है, लेकिन हमारी पहचान सबसे बड़ी है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और जनरल सेक्रेटरी सरदार जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि इस शोध केंद्र में श्रेष्ठ से श्रेष्ठ अध्यापकों की नियुक्ति कर गुरमुखी लिपि पर शोध किया जाएगा, और शोध तभी संभव है जब हम भाषा को अपने भीतर आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि भले ही हम कहते हैं कि यह हमारी भाषा है, लेकिन घरों में इसका उपयोग कम होता जा रहा है। हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि हम अपनी भाषा का अधिक से अधिक उपयोग करें—बोलने और लिखने दोनों में। उन्होंने कहा कि यद्यपि सामाजिक व्यवस्था के कारण अंग्रेज़ी भाषा भी आवश्यक है, लेकिन मातृभाषा पंजाबी के लिए हमारे प्रयास और तेज़ होने चाहिए।उन्होंने बताया कि सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाबी मातृभाषा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है, और इनके कमेटी में कार्यकाल के दौरान तथा कोरोना काल में ही मेडिकल क्षेत्र में सेवाओं की शुरुआत भी की गई।
उन्होंने कैबिनेट मंत्री से अपील की कि सरकारी स्तर पर भी पंजाबी भाषा के संवर्धन के लिए प्रयास किए जाएं और पंजाबी भाषा के क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने इस सेंटर के लिए 25 से 30 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं।उन्होंने कहा कि जहां भारत के अनेक राज्यों में पंजाबी को दूसरी भाषा का दर्जा प्राप्त है, वहीं पाकिस्तान, कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित विभिन्न देशों में करोड़ों लोग पंजाबी मातृभाषा बोलते हैं और विश्वभर में इसका नाम है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस सेंटर में गुरमुखी पर व्यापक शोध होगा, मातृभाषा का प्रचार-प्रसार होगा और हमारे युवा अपनी मातृभाषा के लिए कार्य कर सकेंगे।कार्यक्रम में अन्य के अलावा कमेटी के सीनियर उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह के.पी., आत्मा सिंह लुबाना (जूनियर उपाध्यक्ष), जसमें सिंह नोनी (सचिव), कॉलेज के चेयरमैन पद्म भूषण सरदार तरलोचन सिंह, इंदरप्रीत सिंह कोछड़ (कोषाध्यक्ष), उप चेयरमैन ऋषिप्रीत सिंह सचदेवा, प्रिंसिपल प्रो. गुरमोहिंदर सिंह और वाइस प्रिंसिपल हरबंस सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।