सुरक्षित प्रबंधन के लिए समर्पित 442 मिलियन क्यूबिक मीटर बाढ़ कुशन प्रदान करती है। पूर्ण जलाशय स्तर (एफआरएल) पर 1,365 मिलियन क्यूबिक मीटर के सकल जलाशय भंडारण के साथ, परियोजना यह सुनिश्चित करती है कि बाढ़ की अवधि के दौरान लगभग एक तिहाई जलाशय खाली रहे, जिससे यह अतिरिक्त बाढ़ के पानी को एकत्रित करने और डाउनस्ट्रीम में निवास कर रहे समुदायों की रक्षा करने में सक्षम हो सके।
एनएचपीसी ने सुबनसिरी नदी के किनारे विस्तृत नदी तट संरक्षण और कटाव नियंत्रण उपायों को लागू किया है, जिसमें डाउनस्ट्रीम में 30 किमी तक संरक्षण कार्यों को पूरा किया है और लगभग 522 करोड़ रुपए के निवेश के साथ इस कार्य को 60 किमी तक आगे किया जाना है। इन उपायों ने नदी तटों को पांच साल से अधिक समय के लिए प्रभावी ढंग से स्थायीकृत कर दिया है। इसके अतिरिक्त, एनएचपीसी आईआरएमए के साथ मिलकर डाउनस्ट्रीम में निवास कर रहे समुदायों के विकास के लिए सुअर पालन, रेशम उत्पादन और हथकरघा आदि आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से उनकी सहायता कर रही है। ये विकासात्मक पहलें, अब चालू हैं, लगभग 5,000 महिला किसानों को लाभान्वित करती हैं और क्षेत्र में संधारणीय सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देती हैं।
पूरे भारत में 16 लाभार्थी राज्यों को विद्युत आपूर्ति के अतिरिक्त, सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना अरुणाचल प्रदेश और असम को निःशुल्क विद्युत आवंटन प्रदान करेगी, जबकि पूर्वोत्तर क्षेत्र को परियोजना से 1,000 मेगावाट विद्युत प्राप्त होगी, जो क्षेत्रीय ऊर्जा उपलब्धता को काफी सुदृढ़ करेगी।
परियोजना के निर्माण चरण के दौरान प्रतिदिन लगभग 7,000 स्थानीय लोगों को नियोजित करके और संविदाकारों, सेवा प्रदाताओं और स्थानीय बाजारों के माध्यम से कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का निर्माण हुआ है जिससे क्षेत्रीय स्तर पर सुदृढ़ सामाजिक-आर्थिक लाभ हुए हैं। परियोजना के चालू होने और विद्युत की निरंतर उपलब्धता के साथ, नए लघु उद्योगों के शुरू होने की उम्मीद है, जिससे आप्रवासन को कम करने में मदद करते हुए रोजगार और व्यावसायिक अवसरों का विस्तार होगा। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना से पर्यटन को बढ़ावा मिलने और रिवर नेविगेशन में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे दीर्घकालिक क्षेत्रीय विकास और समृद्धि में योगदान मिलेगा।
एनएचपीसी ने अरुणाचल प्रदेश और असम में सीएसआर पहलों में लगभग 155 करोड़ रुपए का निवेश किया है। प्रमुख कार्यों में स्वच्छ विद्यालय अभियान के अंतर्गत 3,129 शौचालयों का निर्माण, डोलुंगमुख में 250 छात्रों के लिए विवेकानंद केंद्र विद्यालय की स्थापना, 1,841 स्थानों पर सुरक्षित पेयजल सुविधाएं प्रदान करना और 9 स्थानों पर स्वच्छ आरओ पानी प्रदान करना और सामुदायिक हॉल, मीटिंग हॉल, कॉजवे और आसपास के क्षेत्रों में जल आपूर्ति योजनाओं जैसी कई ग्रामीण विकास परियोजनाओं को निष्पादित किया गया है।
पिछले पांच दशकों में, एनएचपीसी ने कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनाओं को सफलतापूर्वक निष्पादित किया है। एनएचपीसी 100% हरित ऊर्जा कंपनी के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करते हुए सौर, पवन और हरित हाइड्रोजन में विविधिकरण किया है। प्रचालनरत 30 पावर स्टेशनों से 8333 मेगावाट की संस्थापित क्षमता और वर्तमान में निर्माणाधीन 9704 मेगावाट की 14 परियोजनाओं के साथ, एनएचपीसी भारत के स्वच्छ ऊर्जा ट्रांजिशन को आगे बढ़ाने और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।