इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और जनरल सेक्रेटरी सरदार जगदीप सिंह काहलों ने बताया कि नए वर्ष के आगमन को ध्यान में रखते हुए दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने अपने अधीन लगभग हर गुरुद्वारे में विशेष कीर्तन समागम आयोजित करने की योजना बनाई थी। इसके तहत गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के भाई लखी शाह वणजारा हॉल, गुरुद्वारा बंगला साहिब, गुरुद्वारा सीसगंज साहिब, गुरुद्वारा नानक प्याऊ, गुरुद्वारा बाला साहिब, गुरुद्वारा मजनूं का टीला और गुरुद्वारा शहीदी अस्थान बाबा बंदा सिंह जी बहादुर में कीर्तन शाम 5:45 बजे शुरू होकर रात 12:15 बजे तक जारी रहे। इस दौरान रागी सिंहों के जत्थों ने गुरु की इलाही बाणी से संगत को निहाल किया। नए वर्ष के आगमन पर रात 12:15 बजे भोग डाले गए और अरदास के उपरांत समापन हुआ। उन्होंने बताया कि रात के कार्यक्रमों के अलावा आज नए वर्ष के पहले दिन दिन के समय भी लाखों लोग गुरुद्वारों में नतमस्तक हुए।
उन्होंने कहा कि इन सभी गुरुद्वारों में लाखों की संख्या में संगत ने हाजिरी भरी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि लोगों ने नाइट क्लबों में पार्टियां करने की बजाय गुरुद्वारों में गुरु साहिब के सामने नतमस्तक होकर नए वर्ष का स्वागत करना अधिक पसंद किया।उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया तरक्की कर रही है और लोगों में खुशहाली आ रही है, वैसे-वैसे लोग यह समझ रहे हैं कि अकाल पुरुष की स्तुति और गुरु की शरण में रहने से ही सब पर कृपा होती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी द्वारा लोगों को गुरसिख जीवन शैली और गुरमुखी से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों के सार्थक परिणाम भी सामने आ रहे हैं, जिसके लिए वे गुरु साहिब के सामने सिर झुकाकर धन्यवाद करते हैं।सरदार कालका और सरदार काहलों ने संगत को नए वर्ष की बधाई देते हुए गुरु साहिब के सामने अरदास की कि वे सर्वत्र भलाई करें और सभी को उत्तम स्वास्थ्य, खुशहाली, तरक्की तथा गुरु की शरण में रहकर गुरु वाला बनने की प्रेरणा दें।