वीर बाल दिवस: मातृभूमि पर बलिदान हुए वीरों को सच्ची श्रद्धांजलि

लेखक 

पंडित मोहन लाल बड़ौली प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा हरियाणा

“वीरता उम्र से बंधी नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति के दृढ़ विश्वासों से परिभाषित होती है।“ 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में हम दशम गुरु , गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी के अद्वितीय बलिदान को नमन करते हैं। केवल 9 वर्ष और 7 वर्ष की अल्पायु में साहिबजादों ने जिस अदम्य साहस, आस्था और बलिदान का परिचय दिया, वह मानव इतिहास में अनुकरणीय है। इतनी छोटी उम्र में भी साहिबजादे किसी दबाव के आगे नहीं झुके, अपनी आस्था से विचलित नहीं हुए और धर्म एवं सत्य की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। यह बलिदान केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है।

सिख धर्म की यह गौरवशाली परंपरा हम सभी के लिए गर्व का विषय है। नई पीढ़ी को साहिबजादों के बलिदान और मूल्यों से परिचित कराना हमारा नैतिक दायित्व है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा वर्ष 2022 से वीर बाल दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की पहल अत्यंत सराहनीय है। इससे बच्चों और युवाओं में शौर्य, साहस और राष्ट्रप्रेम की भावना प्रबल हुई है। जब हम साहिबजादों के जीवन को देखते हैं तो हमें दशम गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा दिए गए संस्कारों और शिक्षाओं पर गर्व होता है। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग दिखाया। उनकी प्रेरक पंक्तियाँ “सवा लाख से एक लड़ाऊँ, चिड़ियन ते मैं बाज लड़ाऊँ, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहलाऊँ।” आज भी हर भारतीय के भीतर साहस और संघर्ष की चेतना जागृत करती है। यह पंक्तियाँ हमें सिखाती हैं कि साधन नहीं, साहस और संकल्प ही विजय का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

भारत की धरती धन्य है, जिसने ऐसे महान गुरुओं और साहिबजादों को जन्म दिया। साहिबजादों का बलिदान हमें निर्भीकता, सत्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रथम की भावना का मार्ग दिखाता है। उनका जीवन हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। राष्ट्र, संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए चारों साहिबजादों ने अन्याय, अत्याचार के सामने झुकने से मना करते हुए धर्म परिवर्तन नहीं किया। छोटी सी आयु में भी धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के लिए बलिदान दिया, यह अडिग आस्था, वीरता एवं साहस की मिसाल है।

वीर बाल दिवस पर मैं देश के सभी नौजवानों से अपने स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह करूंगा। जब भारत का युवा फिट होगा तो वो अपने जीवन में, अपने करियर में भी सुपरहिट होगा। भारत के युवाओं को अपने लिए कुछ नियम अवश्य बनाने चाहिए, उन्हें फॉलो करना चाहिए। जैसे आप दिन में या सप्ताह में कितनी फिजिकल एक्सरसाइज करते हैं? आप सुपरफूड मिलेट्स-श्रीअन्न के बारे में जानते हैं लेकिन क्या आपने इसे अपनी डाइट में शामिल कर रखा है? डिजिटल डीटॉक्स, डिजिटल डीटॉक्स करने पर आप कितना ध्यान देते हैं? आप अपनी मेंटल फिटनेस के लिए क्या करते हैं?

क्या आप एक दिन में पर्याप्त नींद लेते हैं या फिर नींद पर उतना ध्यान ही नहीं देते? ऐसे बहुत सारे सवाल हैं जो आज की आधुनिक युवा पीढ़ी के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं। एक और बहुत बड़ी समस्या भी है, जिस पर एक राष्ट्र के रूप में, एक समाज के रूप में हमें ध्यान देने की ज़रूरत है। ये समस्या है, नशे और ड्रग्स की है। इस समस्या से हमें भारत की युवाशक्ति को बचाना है। इसके लिए सरकारों के साथ-साथ परिवार और समाज की शक्ति को भी अपनी भूमिका का विस्तार करना होगा।

गुरु गोविंद सिंह जी के बेटों के शहादत दिवस को ‘वीर बाल दिवस’ घोषित कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने उनके बलिदान की गाथा को देश और दुनिया के हर कोने-कोने में फैलाया है। गुरु गोविंद सिंह जी के चार पुत्रों, बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की मार्मिक कहानी से वीर बाल दिवस प्रेरित हुआ है। प्रत्येक पुत्र ने सिख मूल्यों की रक्षा, पालन और संरक्षण के लिए असाधारण वीरता और समर्पण का परिचय दिया। बड़े पुत्र अजीत सिंह और जुझार सिंह ने दिसंबर 1705 में चमकौर के युद्ध में वीरतापूर्वक अपने प्राणों की आहुति दे दी। मुगल सेना ने उनके छोटे भाइयों, जोरावर सिंह और फतेह सिंह को पकड़ लिया और उन पर अत्याचार किया। मात्र 9 और 6 वर्ष के इन दोनों छोटे साहिबजादों ने इस्लाम धर्म अपनाने से इनकार कर शहादत स्वीकार कर ली और उन्हें एक दीवार में जिंदा दफना दिया गया। उनकी कहानी पीढ़ियों तक कायम रही है क्योंकि उनके बलिदान न केवल अटूट आस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं बल्कि दृढ़ विश्वास और धार्मिकता की अपार शक्ति को भी दर्शाते हैं।

भारत सरकार ने मोदी जी के नेतृत्व में इन युवा शहीदों के साहस, समर्पण और बलिदान को सम्मानित करने के लिए 2022 में इस दिवस को राष्ट्रीय अवकाश की शुरुआत की जिन्होंने अपने धर्म और मातृभूमि के प्रति दृढ़ निष्ठा बनाए रखी। एक बार पुनः महान गुरू परंपरा को, शहादत को नया सम्मान, नई ऊंचाई पर पहुंचाने वाले वीर साहिबज़ादों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए मअपने लेख को विराम देता हूं।जय जय चारों साहिबजादे,जय मां गुजरी का बलिदान ।ऐसे ही वीरों के दम पर हिंदुत्व सुरक्षित हिंदुस्तान।हम सभी ऋणी उन वीरों के उनको हम शीश झुकाते हैं।जिन बलिदानों के बल पर हम सब गर्व से हिंदू कहते हैं।।