दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा की केन्द्र सरकार ने संसद में विपक्ष को प्रदूषण पर विस्तृत चर्चा नही करने दी और इसी प्रकार दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी प्रदूषण के मुद्दे से पल्ला झाड़ते हुए प्रदूषण पर सर्वदलीय बैठक भी नही बुलाई, इसलिए हमने पर्यावरणविदों तथा समाज के जागरुक वर्गों जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक, केंसर, अस्थमा, स्त्री रोग विशेषज्ञ के डॉक्टर्स, आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी, छात्र, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता सफाई कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी आदि जो राजधानी में स्वच्छ हवा एवं स्वच्छता के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दे सकते है, उनके साथ लोक संसद का आयोजन करते हुए प्रदूषण को लेकर संवाद से समाधान विषय पर वेस्टर्न कोर्ट, जनपथ के सभागार में विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम को एडवोकेट सुनील कुमार ने कोऑर्डिनेट किया ।श्री देवेन्द्र यादव ने बताया कि लोक संसद में प्रदूषण पर उचित विचार विमर्श और चर्चा के बाद हम दिल्ली के प्रदूषण के समाधान पर एक विस्तृत सुझाव पत्र संकलित करेंगे और उसे सरकार और समाज के विभिन्न वर्गों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे ताकि हमारे सुझाव और पहले के बाद दिल्ली के लोग बेहतर वातावरण में आसानी से स्वच्छ सांस ले सकें। उन्होंने कहा की हमने दिल्ली के लोगों से भी प्रदूषण को लेकर सुझाव मांगे है।
वायु लोक संसद में प्रदेश अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव के साथ मुख्य रुप से पर्यावरणविद श्री विमलेन्दु झा और डा0 जितेन्द्र नागर ने दिल्ली में प्रदूषण के दुष्प्रभावों और जनता के लिए प्रदूषण के समाधानों पर चर्चा करते हुए प्रदूषण नियंत्रण के दिल्ली सरकार को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए क्योंकि दिल्ली के लोगों को स्वस्थ जीवन देने की जिम्मेदारी सरकार के साथ हम सब की है।श्री देवेन्द्र यादव ने लोक संसद को सम्बोधित करते हुए कहा कि संवाद से समाधान कार्यक्रम के आयोजन के पीछे का हमारा विचार प्रदूषण के ज्वलंत मुद्दे पर चर्चा करना है क्योंकि केंद्र सरकार के साथ-साथ दिल्ली में भी भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार भी खतरनाक प्रदूषण की समस्या का व्यवहारिक और स्थायी समाधान निकालने में अभी तक विफल रही है। श्री यादव ने कहा कि हाल ही में संपन्न संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस सहित सम्पूर्ण विपक्ष की मांग के बावजूद भाजपा सरकार ने प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हमने प्रदूषण पर दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक की भी मांग की है ताकि विपक्ष भी दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के तरीके और समाधान के सुझाव प्रस्तुत कर सके, लेकिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हमारी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया, जबकि लगातार 400-500 एक्यूआई तक स्तर के खतरनाक प्रदूषण से परेशान दिल्ली के लोग सांसों के संकट से जूझ रहे है।
श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि यह लोक संसद का हमने दिल्ली के बदहाल और ध्वस्त बुनियादी ढ़ांचे पर ध्यान केन्द्रित करते हुए सभी के साथ विचार विमर्श करके प्रदूषण की समस्या का समाधान प्रस्तुत करने के लिए आयोजन किया है। लोक संसद में मौजूद सभी प्रतिभागियों ने प्रदूषण व दिल्ली की अन्य ज्वलंत समस्याओं पर अपनी चिंता जताई, कुछ सवाल भी उठाए और अपने सुझाव भी दिए। लोक संसद में सभी को अपने सुझाव देने के लिए बराबर का मौका दिया गया।श्री देवेंद्र यादव ने दिल्ली में सभी सार्वजनिक परिवहन को मुफ्त करने का सुझाव दिया। उन्होंने लक्ज़मबर्ग, टेनिन, वाशिंगटन, यूएसए आदि का हवाला देते हुए कहा कि वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहन प्रदूषण है, जो आज गंभीर और आपात स्थिति बन चुका है। उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को तुरंत इस नीति को लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईआईटी द्वारा विकसित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के रियल-टाइम स्रोत विश्लेषण डेटा से यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली के वायु प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। शीतकाल के दौरान दिल्ली में स्थानीय पीएम 2.5 प्रदूषण का 51 से 53 प्रतिशत हिस्सा वाहनों से आता है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर उत्पन्न प्रदूषण का अनुपात वर्ष 2024 में 27.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में लगभग 35 प्रतिशत हो गया है, जबकि आसपास के एनसीआर जिलों से आने वाले प्रदूषण का योगदान 2023 के 36 प्रतिशत से घटकर 2025 में 25.8 प्रतिशत रह गया है। यह आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि दिल्ली का वायु प्रदूषण अब मुख्य रूप से स्थानीय और परिवहन-जनित है।
श्री देवेंद्र यादव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से यह स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने से निजी वाहनों से सार्वजनिक परिवहन की ओर उल्लेखनीय बदलाव होता है, जिससे ईंधन की खपत और उत्सर्जन में कमी आती है। इससे सामाजिक समानता को मजबूती मिलती है और रोजगार व आवश्यक सेवाओं तक सभी वर्गों की पहुँच बेहतर होती है। उन्हांने कहा कि दुनिया भर में किराया-मुक्त सार्वजनिक को बढ़ते वायु प्रदूषण, यातायात जाम, आवागमन में असमान पहुँच और घरेलू परिवहन खर्चों में वृद्धि जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए अपनाया जा रहा है। दिल्ली जैसे शहर में, जहाँ प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और सामाजिक असमानता एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं, निःशुल्क या किफायती सार्वजनिक परिवहन कोई कल्याणकारी योजना मात्र नहीं, बल्कि जन-स्वास्थ्य और जलवायु संरक्षण की अनिवार्य आवश्यकता है।