गणतंत्र दिवस परेड में बीकानेर की उस्ता कला की शानदार प्रस्तुति के लिए मिला सम्मान।

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में प्रस्तुत “राजस्थान (मरुस्थल का स्वर्णिम स्पर्श: बीकानेर स्वर्ण कला (उस्ता कला)” की झांकी ने पॉपुलर चॉइस श्रेणी में तृतीय पुरस्कार प्राप्त कर राज्य का गौरव बढ़ाया है। बीकानेर की प्रसिद्ध उस्ता कला से सजी इस झांकी ने देश-विदेश के दर्शकों का बखूबी ध्यान आकर्षित करके राष्ट्रीय स्तर पर यह पुरस्कार प्राप्त किया है।
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ से यह पुरस्कार राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यटन, कला, साहित्य एवं संस्कृति) प्रवीण गुप्ता ने नई दिल्ली के महिपालपुर स्थित रक्षा संस्थान में ग्रहण किया। इस अवसर पर संयुक्त शासन सचिव (कला, साहित्य एवं संस्कृति) अनुराधा गोगिया एवं ललित कला अकादमी के सचिव डॉ. रजनीश हर्ष भी उपस्थित रहे।अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन एवं उपमुख्यमंत्री श्रीमती दिया कुमारी के निर्देशन में गणतंत्र दिवस परेड-2026 में बीकानेर की सदियों पुरानी उस्ता कला से प्रेरित राजस्थान की झांकी ने ‘सुनहरा स्पर्श’ थीम के तहत राज्य की शाही विरासत, शिल्प कौशल और सांस्कृतिक गहराई को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।झांकी के डिज़ाइनर एवं पर्यवेक्षक हर्षित शर्मा के अनुसार, ट्रेलर भाग में उस्ता कला से अलंकृत घूमती हुई पारंपरिक कुप्पी, कारीगरों के सजीव दृश्य और पीछे की ओर ऊँट व उस पर सवार प्रतिमा राजस्थान की मरुस्थलीय संस्कृति का सशक्त प्रतीक बनी। झांकी में लगभग 180 डिग्री घूमती प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसकी ऊँचाई लगभग 13 फीट थी।उल्लेखनीय है कि मायगॉव प्लेटफॉर्म पर देशव्यापी जनमतदान के आधार पर पॉपुलर चॉइस श्रेणी में गुजरात को प्रथम, उत्तर प्रदेश को द्वितीय और राजस्थान को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
गणतंत्र दिवस की परेड में राजस्थान की इस झांकी ने यह सिद्ध किया कि राज्य की पारंपरिक कलाएँ न केवल सांस्कृतिक विरासत हैं, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर और आत्मनिर्भरता की मजबूत पहचान भी हैं।