हरियाणा सरकार ने पंजाब गांव सांझा भूमि (विनियमन) नियम, 1964 में किया संशोधन

गौशाला की स्थापना करने वाले सामाजिक व धार्मिक संस्थानों को लाभान्वित करने के लिए आगे बढ़ें

चंडीगढ़ :  गौशाला, बायोगैस संयंत्र, पंचगव्य उत्पाद, पशु चिकित्सा अस्पताल, अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना करने वाली इच्छुक  सामाजिक सोसायटी या धार्मिक संस्थाएं तथा चारे को उगाने के लिए अब शामलात भूमि को 20 वर्ष तक की अवधि के लिए पट्टे पर ले सकेंगी, इसके लिए हरियाणा सरकार ने पंजाब गांव सांझा भूमि (विनियमन) नियम, 1964 के उप-नियम (2क) में संशोधन किया है। गौशालाओं में पट्टा धारक को कुल पशु जनसंख्या का कम से कम 50 प्रतिशत बेसहारा पशुओं को पट्टा अवधि के दौरान गौशाला में  रखना होगा।

यह निर्णय आज यहां मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया। इन नियमों को पंजाब गांव सांझा भूमि (विनियमन) हरियाणा संशोधन नियम, 2023 कहा जाएगा। उक्त संशोधन के बाद, अब ग्राम पंचायत को अपनी भूमि आवंटन के माध्यम से 20 वर्ष तक की अवधि के लिए कम से कम प्रति वर्ष 5100 रुपये प्रति एकड़ की दर से पट्टे पर देने की अनुमति होगी। धार्मिक संगठन को समाज के लिए परोपकारी योगदान के इतिहास के साथ उनके पूर्वजों को सत्यापित किया गया है जिसे जिला स्तरीय समिति और हरियाणा गौ सेवा आयोग द्वारा अनुशंसित किया जाएगा।

शामलात देह में किसी भी भूमि को गौशाला निर्माण के उपरान्त प्रति 100 पशुओं (कम से कम 50 प्रतिशत बेसहारा पशु)के लिए 0.75 एकड़ के अनुपात में गौशाला की स्थापना हेतु पट्टे पर देने की अनुमति दी जायेगी। शामलात देह में किसी भी भूमि को बायोगैस संयंत्र, पंचगव्य उत्पाद, पशु चिकित्सा अस्पताल, अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र आदि जैसे सहायक उद्देश्यों के लिए 1500  पशुओं (कम से कम 50 प्रतिशत बेसहारा पशु) वाली गौशाला को 2 एकड़ भूमि पट्टे पर देने की अनुमति दी जाएगी।

गौशाला निर्माण के बाद गौचरण के लिए चिन्हित भूमि में से 1.5 एकड़ भूमि प्रति 100 पशुओं (कम से कम 50 प्रतिशत बेसहारा पशु)के लिए चारे की खेती हेतु पट्टे पर देने की अनुमति दी जाएगी।

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