भारत के ऊर्जा संक्रमण को दुनिया के लिए एक मॉडल बनाने की दिशा में कार्यरत – महत्वाकांक्षा में मजबूत, क्रियान्वयन में स्थिर और प्रभाव में समावेशी: श्रीपद येसो नाइक

श्रीपद येसो नाइक, राज्य मंत्री (विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा), भारत सरकार ने आज कहा कि भारत का ऊर्जा संक्रमण केवल एक आकांक्षा नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्यों और निर्णायक फैसलों पर आधारित एक सतत परिवर्तन है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री श्री मोदी के विज़न के तहत भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है और 2070 तक नेट ज़ीरो की दिशा में अग्रसर है।”

फिक्की द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘इंडिया एनर्जी ट्रांजिशन समिट’ को संबोधित करते हुए श्री नाइक ने कहा कि आज देश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 520 गीगावाट से अधिक हो चुकी है, जिसमें आधे से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से आता है। हाल के वर्षों में सौर क्षमता तीन गुना से अधिक बढ़ी है और नवीकरणीय ऊर्जा अब मुख्यधारा का हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने कहा, “यह प्रगति नीतिगत स्पष्टता, पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के विस्तार, अल्ट्रा मेगा नवीकरणीय ऊर्जा पार्कों के प्रोत्साहन, पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर, पीएम कुसुम योजना के तहत कृषि सौरकरण और घरेलू विनिर्माण को मजबूत बढ़ावा देने का परिणाम है।”

मंत्री ने आगे कहा कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से सरकार औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन को सक्षम बनाते हुए, आयात निर्भरता कम कर और उभरती वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति को सुदृढ़ कर अगला विकास क्षितिज तैयार कर रही है। उन्होंने कहा, “इस गति को बनाए रखने के लिए केवल क्षमता वृद्धि से आगे बढ़कर सिस्टम इंटीग्रेशन पर ध्यान देना होगा। हमें ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना, भंडारण समाधानों का विस्तार, ग्रिड लचीलापन बढ़ाना और वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी। ऊर्जा सुरक्षा, वहनीयता और समावेशिता हमारे दृष्टिकोण के केंद्र में रहनी चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन संक्रमण के अगले चरण का केंद्रीय तत्व होगा। इस्पात, सीमेंट, रसायन और रिफाइनिंग जैसे कठिन क्षेत्रों को स्वच्छ तकनीक, हरित हाइड्रोजन, विद्युतीकरण और नवाचारी वित्तीय मॉडलों को अपनाना होगा। “सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और वैश्विक साझेदारों के बीच सहयोग इस परिवर्तन की गति और सफलता तय करेगा,” मंत्री ने जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत का ऊर्जा संक्रमण केवल उत्सर्जन घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, रोजगार सृजन, ऊर्जा आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने और एक सशक्त अर्थव्यवस्था के निर्माण से भी जुड़ा है। “यह गांवों, शहरों, एमएसएमई और उद्योगों में स्वच्छ ऊर्जा आधारित विकास सुनिश्चित करने का प्रयास भी है। आइए, हम मिलकर इस गति को बनाए रखें और भारत के ऊर्जा संक्रमण को दुनिया के लिए एक मॉडल बनाएं – महत्वाकांक्षा में मजबूत, क्रियान्वयन में स्थिर और प्रभाव में समावेशी,” श्री नाइक ने कहा।

घनश्याम प्रसाद, अध्यक्ष, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, भारत सरकार ने कहा कि भारत का ऊर्जा संक्रमण अब संरचित और दीर्घकालिक प्रणाली नियोजन द्वारा समर्थित है। नीति आयोग और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के समन्वय से तैयार व्यापक रोडमैप के माध्यम से देश ने महत्वाकांक्षा से आगे बढ़कर क्रियान्वयन योग्य रणनीति अपनाई है, जो 2070 तक संसाधन पर्याप्तता, विद्युतीकरण, भंडारण और ट्रांसमिशन योजना पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि संक्रमण के अगले चरण में नवीकरणीय विस्तार के साथ ग्रिड स्थिरता, बाजार सुधार और वित्तीय स्थिरता के संतुलन की आवश्यकता होगी। पंप्ड हाइड्रो, बैटरी भंडारण, परमाणु क्षमता विस्तार, कार्बन बाजार और नीतिगत सुधारों पर जोर क्षमता वृद्धि से प्रणाली की मजबूती और विश्वसनीयता की ओर बदलाव का संकेत देता है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत का ऊर्जा संक्रमण किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए सरकार, नियामकों, डेवलपर्स, वित्तीय संस्थानों और उपभोक्ताओं की समन्वित कार्रवाई आवश्यक है। “सामूहिक प्रयासों से ही हम सुरक्षित, वहनीय और सतत ऊर्जा भविष्य का निर्माण कर सकते हैं,” उन्होंने कहा।

भारत में ऑस्ट्रिया दूतावास की उप प्रमुख गिसेला क्रिस्टोफेरिट्स ने कहा, “मैं न केवल भारत द्वारा निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्यों से प्रभावित हूं, बल्कि अब तक हासिल की गई उल्लेखनीय प्रगति से भी अत्यंत प्रभावित हूं। ऑस्ट्रिया से होने के नाते, जहां लगभग 90% बिजली नवीकरणीय स्रोतों से आती है, मैं भारत के ऊर्जा संक्रमण के पैमाने, गति और समावेशिता की सराहना करती हूं, जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हुए लचीलापन और वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ कर रहा है।”

पिनाकी भट्टाचार्य, सह-अध्यक्ष, फिक्की आरई सीईओ समिति एवं संस्थापक, प्रबंध निदेशक और सीईओ, एएमपिन एनर्जी ट्रांजिशन ने कहा, “भारत आज दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में से एक है। ऊर्जा संक्रमण चार पहियों की यात्रा की तरह है – नीतिगत समर्थन, वित्त, डेवलपर्स और उपभोक्ता – इन सभी को पूर्ण सामंजस्य में आगे बढ़ना होगा। जब ये चारों शक्तियां साथ मिलकर कार्य करेंगी, तब हम 2030 के लक्ष्यों और 2070 के नेट ज़ीरो विज़न की ओर तेजी से बढ़ सकेंगे।”

दिनेश बत्रा, सह-अध्यक्ष, फिक्की पावर समिति एवं कार्यकारी उपाध्यक्ष, हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स ने कहा कि 2070 के नेट ज़ीरो लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम हरित विकास को ऊर्जा सुरक्षा, वहनीयता और प्रणाली की विश्वसनीयता के साथ कितनी कुशलता से संतुलित करते हैं।

सैंडी खेरा, अध्यक्ष, फिक्की आरई डेवलपर्स टास्कफोर्स एवं कंट्री मैनेजर और सीईओ, एनेल ग्रीन पावर ने कहा कि यह परिवर्तन अब दूर का सपना नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक भविष्य का केंद्र है। स्थिरता, लचीलापन और अनुशासित क्रियान्वयन के साथ भारत पैमाने, नवाचार और समावेशी विकास के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा संक्रमण का नेतृत्व कर सकता है।

प्रबीर नेओगी, मेंटर, फिक्की पावर समिति ने कहा, “स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मजबूत नीतिगत समन्वय, ग्रिड और भंडारण की तैयारी, वित्तीय नवाचार और अनुशासित क्रियान्वयन आवश्यक है। यदि हम विश्वसनीयता, वहनीयता, स्थिरता और समावेशिता के सिद्धांतों से निर्देशित रहेंगे, तो भारत वैश्विक संक्रमण का नेतृत्व करने की मजबूत स्थिति में है।”

उद्घाटन सत्र के दौरान ऊर्जा भंडारण पर फिक्की-क्रिसिल रिपोर्ट और ‘भारत का ऊर्जा संक्रमण’ पर फिक्की स्मारिका का विमोचन किया गया।